Monday, August 25, 2008

मेरे सपनो का भारत....


शायद यह एक ऐसा विषय है जिस पर लिखना मेरे बस के बाहर है ।
व्यक्ति के मानस पर अंकित विचारो को व्यक्त किया जा सकता ही.... किंतु उसके अंतर्मन मे हिलौरे ले रही स्वपनीय कल्पनाओ को लेख द्वारा अभिव्यक्त या मुद्रित करना बहुत हे कठिन है ......

भारत एक ऐसा राष्ट्र जहा मन्दिर भी सोने के....ज्ञान इतना की तक्षिला नालंदा जैसे विश्व विद्यालय .... आस्था इतनी की पत्थर मे भी देवता जाग्रत हो उठे....न्याय इतना की माँ अपने एक मात्र पुत्र को हाथी के पैरो तले कुचलवा दे .... भक्ति इतनी की देवी देवता साक्षात् दर्शन दे .... आध्यात्म इतना की विश्व गुरु की संज्ञा मिल जाए ..... रण कोशल इतना की विश्व विजेता भी यहाँ दम तोड़ जाए ..... भाई चारे मे वासुदेव कुटुम्बकम का पाठ हो... विश्व को पहली मानव सभ्यता का ज्ञान हमने कराया .... विश्व को अंको की देन ,देने वाला महान भारत .....

किंतु आज यह कहा है ?? कहा है भारत का वह गौरवमई इतिहास??
आज के भारत को देख मन विचलित है....उस अद्भुत गौरव को गाथा आज देश मई मजाक का विषय है....राष्ट्र प्रेम की बातें कोरी बकवास और राष्ट्र पुनर्निर्माण की भावना मुर्खता और कट्टरता का प्रतिक .... और इस राष्ट्र के पहचान उस महान जीवन संस्कार का मजाक उड़ना मानव सभ्यता और फैशन बन गया है ....

आज देश मे भ्रष्टाचार , गरीबी , आतंकवाद, साम्प्रदायिकता इतनी बढ़ चुकी है की इस महान वृक्ष की जड़े भी शायद अब हिलने लगी है .....

किंतु मेरे सपनो का भारत इसके ठीक विपरीत एक धार्मिक , समर्थ , सम्रध और सशक्त राष्ट्र के रूप मे मानो आस्था के केन्द्र के रूप मे ह्रदय के मध्य स्तिथ है

हिमालय इस माँ का मुकुट है ..... तो सागर इसके पर धो रहा है ...... दहाड़ते हुए सिंह के मुख की आकृति वाला गुजरात दुश्मनों को ललकार रहा है ..... गंगा , यमुना , नर्मदा जैसे सहस्त्रो नदिया इस देश का मेला धो रही है .... भारत का विजय पताका कंधार मे हो और धर्म राष्ट्र की नींव .... भाईचारा हमारी पहचान हो और वीरता का लोहा दुनिया माने .....
मेरे सपनो के भारत मे न तो कोई भूखा सोता होगा न कोई दुःख मे आकेला रोता होगा..... बंधुत्व की परिभाषा भारत की परपाटी मे हो हमारे भारत का धर्म राष्ट्र धर्मं हो और आराध्य देवी विधाता स्वरुप माँ भारती .... वंदे मातरम के उद्घोष से व्यक्ति व्यक्ति का रोम रोम प्रफुल्लित हो जो मस्तक पर सूर्य सा तेज़ और बाजुओ मे लोह का दम भर दे ....
इस भारत मे सत्य की पूजा हो और इमानदारी कर्म...
राष्ट्र भक्ति की ऐसी मिसाल कायम हो की विश्व का प्रत्येक व्यक्ति भारत मे जन्म लेने की कामना करे ......

और अंत मे सिर्फ़......
पथ कठिन हो या सरल हो चलने का सामन मांगे .....
तेज तूल बलिदान पुलकित देश का सम्मान मांगे।
चिर विजय की कामना हर स्वस्थ मनन अपना रहे है ...
देश जागे देश जागे मंत्र सब गूंजा रहे है ॥

!! जय जय भारत !!

9 comments:

छात्र संवाद said...

dek yar apune to pda nahi par coments kar dete hai bahut achcha likabat hai

Anonymous said...

Mother India needs children like you...I am very lucky to know a person like you !!!
keep writing beautifully bro....

Anonymous said...

hummm...badiya hai ..!!

Anonymous said...

It is relly a nice thoughts wrote by u. India needs a persons like u.....
may god fullfill ur dreams.

RAJENDER SONI Secy AICC OBC dpt.| Member PCC Rajasthan said...

Its very nice Nikhil ji.... u r gud writer...
visit my blog
www.rajendedrsoniindianvoice.blogspot.com

Anonymous said...

you have written such a nice essay.it is very thoughtful.keep writing

nandini chaturvedi said...

bhut hi acha hai I LIKE IT :)

yugam said...

NICE THOUGHTS. REALY U HV A FANTASTIC FEELING TOWARDS THE COUNTRY.

Unknown said...

u r d best essay writer.u have really shared amazing thoughts