Sunday, September 7, 2008

भारत का परमाणु परिक्षण...!!!

यह जो लेख मई यहाँ प्रतुत कर रहा हूँ एक बहुत हे पुराना लेख है जो भावना के ज्वर मे बह कर लिखा था... लेख वही है जो उस समय लिखा गया था ॥ क्युकी मेरा मानना है की राष्ट्रीय अवाम सामाजिक परिद्रश्य मे कुछ गौरवमई क्षण इतने ऐतिहासिक होते है की उनकी प्रासंगिकता कभी समाप्त नही होती... ।
और शायद १९७१ की लडाई के बाद ११ मई१९९८ को पोखरण की धरती पर किया गया वह गगन भेदी धमाका भारतीय स्वाभिमान के जागरण का प्रतिक बना ... ।
इस दिन शायद हे कोई ऐसा अभागा भारतीय नागरिक रहा होगा जिसको ख़ुद के भारतीय होने का अभिमान न हुआ हो ... ।

इन धमाको मई मानो केशव का पांचजन्य गूंज रहा हो , और शिव शम्भू के डमरू की थाप हो , गंगा की धरा का तेज़ हो , विवेकानंद का संदेश हो, अभुमंयु सा सहस हो और गो माता का मर्म हो , शिवा के हिन्दवी साम्राज्य का स्वप्ना हो तो रना प्रताप की शान हो , रामायण , गीता , महाभारत का सार हो और अमर शहीदों का स्वप्ना हो... इन धमाको मई भाग्य विधाता माँ भरती हा तेज़ चालक था...
जन जन को रोमांचित और कण कण को प्रफुल्लित करने वाले यह धमाके भारत वासियों की देश भक्ति की ज्वर साबित हुए थे .
इन धमाको की गूंज से सिर्फ़ भारत हे नही मे अपितु पुरे विश्व मे लोग आश्चर्यचकित थे .... या यु कहे की इन धमाको से पुरी दुनिया अचम्भ्हित थी... ।
इस परिक्षण के लिए तत्कालीन वाजपयी सरकार ने जो निर्भीकता व अदम साहस का परिचय दिया था निचित हे वह किसी सामान्य प्रसंग सा नही है ... भारत की आने वाली पीडिया अवश्य ही उस सरकार के इस राष्ट्रीय स्वाभिमान के काम के प्रति कृतज्ञ आभारी रहेगी...भारत माँ के तमाम लाडले सपूत इस कार्य के लिए तत्कालीन उचाधिकरियो को अपने आशीर्वाद प्रदान करेंगे .... ।
किंतु यह शायद विडम्बना हे है की वामपंथी इस देश मे मौजूद है .... उन्हें इन धमाको के पीछे अपने आस्था के केन्द्र चीन पर मंडराता भविष्य का संकट नज़र आया और शुरू हुई धमाको की समीक्षा और आलोचना ।
इसी बीच धमाको के ठीक बाद मे हम पर अमेरिका द्वारा आर्थिक प्रतिबन्ध लगा दिए गे ... तमाम विदेशी व्यापार ठप पड़ गएकिंतु इसका सामना भी हमने उसी सहस और धेर्य से किया और मुहतोड़ जवाब दिया ... और हमारी अर्थव्यवस्था स्थिर हे नही अपितु सद्रद हुई... इस कार्य के लिए तत्कालीन सरकार और राष्ट्रभक्त नागरिको का कार्य प्रशंसनीय और वन्दनीय है ... अमेरिका और बकाया विश्व को अपनी बोखलाहट का जवाब मिल गया था ... अन्तोगत्वा उससे यह प्रतिबंद हटाने पड़े.... ।
दरअसल अमेरिका और अन्य देश भारत के परमाणु परीशां से जितने बोख्लय थे उसका कारण था उनके खुफिया जानकारियों और तानाशाही को मिली शिकस्त और शायद इसी बोख्लाहत मे और उबाल ला दिया दू दिन बाद किए यह ३ और परीक्षणों ने.... ।
परिक्षण से पहले अन्तिम क्षण तक अमेरिका सहित विश्व की किसी भी खुफिया एजेन्सी को इन परीक्षणों की गंध तक नही लगी थी जिसका लोहा पुरा विश्व मानेगा ।
इन धमाको के लिए सबसे अधिक वन्दनीय समूह उन राष्ट्रभक्त वैज्ञानिको , सेनिको और अनाम व्यक्तियों का है जो इस राष्ट्रीय गौरव के काम मे लगे थे .... ।
किंतु बहुत हे खेद की बात है की जिस तरह तथा कथित बुधिजिवियो और वामपंथियों ने इन धमाको को जिस प्रकार पेश किया वह इस राष्ट्र के साथ मजाक था....राष्ट्र द्रोह था .... इनका कहना था की परमाणु बमों का परिक्षण क्या किया गया उन्हें बना कर रखा भी जा सकता था परिक्षण करने की क्या ज़रूरत ???
तो इसका जवाब साधारण सा था की अगर हमारे पास कोई हतियार है तो उसकी क्षमता का परिक्षण नितांत आवश्यक है अन्यथा वक्त पड़ने पर वह धोका दे सकता है ... ।
इन धमाको से विश्व मे एशिया की शान्ति को ले कर चर्चाये गर्म हो चली ... और इनको बल मिला १६ दिन बाद किए गए पाकिस्तानी परमाणु परीक्षणों से .... ।
अब विश्व के बुधुजिवियो , रक्षा विशेषज्ञों व शान्ति के ठेकेदारों को दक्षिण एशिया विशेष कर भारतीय उपमहाद्वीप मे शान्ति भंग होती दिखी .... यूध के बादल भारत पाक सीमा पर बरसते दिखे .... लेकिन सब कोरी बकवास और व्यर्थ का आकलन साबित हुए ..... ।
अगर हम इतिहास पर नज़र डालेंगे तो पींगे की भारत ने जिन राष्ट्रों या पंथो से मत्री भाव रखा वही आस्तीन का स्सप बन भारत के पतन का कारण बने ... वह चाहे इस्लाम हो अंग्रेज़ या चीनी ... सभी को बारात ने सम्मान और सुविधा प्रदान की तौ यही लोग इस राष्ट्र के पतन के कर्णधार बने ... बस इन्ही धोको से बचने का व अपने भाविश्वा मे होने वाले हमले का मुह तोड़ जवाब देने का मध्यम है यह परमाणु परिक्षण .... ।
जब विश्व मे पहली बार परमाणु बमों का उपयोग किया गया था तब यह हतियार सिर्फ़ अमेरिका के पास थे व उसने हे भीषण तबाही मचाई थी... किंतु जब रूस , चीन, फ्रांस ने को परमाणु संपन्न कर लिया तब कही कोई संहार नही हुआ ....... अतः मेरा दृड़ मत है की भारत भी शान्ति दूत की अपनी पहचान विश्व मे कायम रखेगा ... ।
यह परिक्षण भारतीय सम्पनता...आत्मा निर्भरता का प्रिक साबित होंगे....