Sunday, June 7, 2009

नर्मदा करे पुकार..!!!!

मित्रों यह लेख समर्पित है सदियों से मध्य प्रदेश की असंख्य पीढियों की अनगिनत जनता के कंठ की प्यास बुझाने वाली पुण्य सलिला माँ नर्मदा को ....
हम इस पुण्य सलिला माँ नर्मदा के प्रति कृतज्ञ है और इसको अपनी श्रधा का केंद्र मानते है...

माँ नर्मदा जो इस प्रदेश के ह्रदय रेखा है... इस प्रदेश की धरा को हरा भरा रखने वाली माँ नर्मदा, जन जन के कंठ की प्यास भुजाने वाली माँ नर्मदा,अपने पुण्य प्रताप से पापो को धोने वाली माँ नर्मदा .... अपने आस पास जाने कितनी हे लोक संस्कृतियों को समेटे हुए नर्मदा ........बालक के गर्भ मे आने से लेकर उसके अन्तिम संस्कार तक उसकी पोषक और पालक माँ नर्मदा ......यही आज दूषित है संकुचित है॥.....
ऐसा क्यों ?क्या यह स्तिथि सही है ? क्या हम ऐसा दूषित जल पीने योग्य मानेंगे ? क्या घटता जल स्तर आने वाली हमारी पीढियों की जल आपूर्ति का सामना कर सकेगा ?क्या हम आने वाली पीदियों को माँ नर्मदा कहानी के रूप मे देंगे ?हमारे पूर्वजो द्वारा पूजित इस नदी को क्या हम सुखा और दूषित होते हुए अपनी अखो के सामने देखते रहेंगे ? क्या हम अपने आने वाली पीढियों को पानी के लिए तरसते , झगड़ते देख्नेगे ? क्या नर्मदा मात्र सरकार की जल आपूर्ति करती है जो सिर्फ सरकार इसकी चिंता करे ?
नहीं मित्रो यह सामाजिक दाएत्व है... नर्मदा इस समाज की पोषक है पालक है यह सब सब की संग्रक्षक... नर्मदा हमारे इस समाज की इस प्रदेश और देश की विकास की धारा है ....नर्मदा एक प्रवाह है हमारे जीवन का ....एक अंग है हमारे समाज का...एक प्रतिक है हमारे इतिहास का...और एक भेट है भविष्य की....
साथियों आज समय आया है वर्षो से हो रहे माँ नर्मदा के दोहन के प्राश्चित का... आज समय आया है पीढयों की पालक माँ नर्मदा के प्रति ऋण चुकाने का आज समय आया है आने वाली पीढियों के लिए एक बहुमूल्य रत्न सहेजने का और इन सबसे बड़कर आज समय आया है हमारे कर्तव्यों के परिक्षण का ...
हमारी अनगिनत पीढियों का पोषण करने वाली , इस समाज के उतार - चढाव की साक्षी माँ नर्मदा अपने पुत्रो को पुकार रही है...आवाहन है वर्तमान को बचने का...चेतवानी है भविष्य मे होने वाले जल संकट की... और चुनोती है हमारी अनिच्छा की...क्या माँ नर्मदा का दोहन करने वाले हम आम जन , समाज जन इतने कमज़ोर और दृष्टिहीन है की हमारी आँखों के सामने प्रदुषण के गंदे जाल मै पस्त होती हमारी पालक माँ नर्मदा को ऐसे ही लुप्त हो जाने देंगे ?क्या जन्म जन्मान्तर के पाप धोने वाली नर्मदा इस तरह दीन हीन बनी रहेगी ?क्या नर्मदा का जल पीने वाला समाज आज इतना कामजोर और विकलंग हो गया है जो अपनी माँ की यह करून चीत्कार सुन सके ?क्या हम कर्तव्य की पूर्ति (जो अब हमारी मज़बूरी भी बन गया है) के लिए किसी तारणहार का रास्ता देखंगे ? मित्रो कब तक हम अपने कर्तव्य दुसरो पर डालते रहेंगे ? कब तक प्रकृति के साथ खिलवाड़ करने वाला यह समाज प्रकृति के महत्व को झुठलाता रहेगा ?हम जान कर भी अनजान बने बैठे है ... हम जानते है की पानी की अहमियत क्या है किंतु हम मौन है नर्मदा के इस दोहन पर हम यह कार्य करना नही चाहते है ... कब तक समाज ऐसे ही पंगु बना रहेगा ? क्या हम इतना नही कर सकते की हमारी आने वाली पीढियों का कुछ भला हो ? हम धन संचय करते है ... ज़मीं जायदाद बनते है ... कुन्तु जरा विचार करे जब जल ही नही होगा तो यह किस काम का ...?
मै पुनः कहता हूँ आज समय की पुकार है ... कल शायद यह हुक्म हो जाए और उसके बाद समय हाथ से निकल जाए .....कही देर हो जाए इस लिए अभी से कुछ करना प्रराम्ब करे ... यह एक लंबा अभियान है ... इसमे समय की कोई परिधि नही है ही कोई एक रास्ता है जो इस कार्य को पुरा करने मै सक्षम हो ....यह तो एक अविरल,अथक यात्रा है जो कोटि कोटि जन से शुरू होकर आने वाली असंख्य पीढयों तक चलेगी ....
आइये मित्रों आज से ही प्रण करे... जितना बन सकेगा उतना...जैसे संभव होगा वैसे....अधिक से अधिक,जब तब,हम इस पुण्य सलिला को प्रदुषण मुक्त और प्रवाहमान बनाने मे सहयोग करेंगे... हम संकल्प ले इस जास्ती मे ख़ुद को एक इकाई मान कर काम करेंगे ... हम किसी की रह देखने किसी को मार्ग अवरुद्ध करने देंगे ... ख़ुद ही ख़ुद के मार्गप्रदर्शक बनेगे ... ख़ुद ही उपाय ढूढेंगे और ख़ुद ही उसको क्रियान्वन करेंगे ....
अपने सुझाव के साथ अपना तन मन धन नर्मदा को अर्पित करते है...